(आशीष सिंघल दनकौर)




यमुना तट पर स्थित महाभारत कालीन द्रोण नगरी दनकौर के ऐतिहासिक पौराणिक एवं प्राचीन श्री गुरु द्रोणाचार्य मंदिर जिसमें भील युवराज एकलव्य द्वारा निर्मित श्री गुरु द्रोणाचार्य की पत्थर की मूर्ति विद्यमान है इस मूर्ति को गुरु का दर्जा देते हुए भील युवराज एकलव्य ने धनुर्विद्या सीखी और संभवत  है विश्व का सबसे बड़ा धनुर्धर होने का खिताब पाया श्री द्रोण की मूर्ति क्षेत्र ही नहीं प्रदेश और देश में श्रद्धालुओं की आराध्य श्रद्धा दा का केंद्र बना हुआ है पिछले 20 वर्षों से इस नगरी को पर्यटन नगरी का दर्जा दिलाने के लिए क्षेत्र की जनता प्रयास जारी है श्री द्रोण पर्यटन संघर्ष समिति के अध्यक्ष पंकज कौशिक जो कि 20 वर्षों से लगातार इस को पर्यटन स्थल घोषित कराने के लिए प्रयासरत हैं आज रविवार को महिपाल गर्ग प्रबंधक श्री द्रोण मंदिर समिति के अथक प्रयास व जनता के सहयोग से एक परिक्रमा का आयोजन पहली बार नगर क्षेत्र दनकौर में किया जा रहा है जिसमें आज सैकड़ों की संख्या में लोग इस परिक्रमा में भागीदार बन रहे हैं यह पथ परिक्रमा का रूट लगभग 10 किलोमीटर बनाया गया है जिसमें बुजुर्ग बच्चे महिलाएं सभी लोग ढोल नगाड़े के साथ इस परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं और इस परिक्रमा का उद्देश्य सभी क्षेत्र के लोगों को यह बताने का प्रयास है की हमारे श्री गुरु द्रोणाचार्य मंदिर को ऐतिहासिक स्वरूप है आज इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए हैं अगले महीने की परिक्रमा में इसमें और संख्या बढ़ने की संभावना है आज की इस परिक्रमा के भव्य आयोजन में सुंदरकांड समिति दनकौर का विशेष सहयोग रहा सुंदरकांड टीम के साथ अतुल कुमार मित्तल,पवन प्रजापत, राजेंद्र मित्तल, प्रमोद गोयल, आशीष सिंघल, रमेश चंद बुक सेलर, हेमंत हार्डवेयर, पवन शर्मा झाझर रोड, राजेंद्र शर्मा, महावीर, राजेश मैडम, यशस्वी निरंजन वर्मा, गोपाल वर्मा, हरीश बिजली वाले झाझर रोड मास्टर पन्ना लाल शर्मा,  मुन्नालाल टेंट वाले, महिपाल गर्ग प्रबंधक श्री द्रोण मंदिर समिति रजनीकांत अग्रवाल प्रबंधक श्री द्रोण गौशाला समिति, अनिल मांगलिक, पंकज कौशिक नंद किशोर गर्ग, संदीप जैन संचालक एसडी आरबी कान्वेंट स्कूल, संजय वर्मा, लक्ष्मीनारायण गर्ग, राधेश्याम प्रजापति इत्यादि सैकड़ों लोग इस ऐतिहासिक परिक्रमा मैं शामिल हुए! इस परिक्रमा में पुलिस के सहयोग से एक पीसीआर सबसे आगे परिक्रमा रूट पर परिक्रमा करने वाले भक्तों के साथ चक्रपाणि शर्मा के नेतृत्व में सबसे आगे रही!
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