आशीष सिंघल दनकौर -







गुरु द्रोणाचार्य मंदिर प्रबंध समिति द्वारा रविवार को गुरु द्रोणाचार्य बाबा की विशाल परिक्रमा एवं शोभायात्रा दनकौर नगर व आसपास के क्षेत्र में निकाल कर गुरु द्रोणाचार्य जैसी शिक्षा और शिक्षा के प्रति एकलव्य शिष्य की निष्ठा के प्रति  क्षेत्रवासियों को जागरूकता का संदेश दिया गया। इस मौके पर  गुरु द्रोणाचार्य के भक्त जनों को  संबोधित करते हुए  द्रोण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पंडित पंकज कौशिक ने कहा  की वर्तमान परिवेश में  देश को  आज  गुरु द्रोणाचार्य  और शिष्य एकलव्य  जैसों की सख्त जरूरत है । युवा पीढ़ी को गुरु और शिष्य की संस्कार व नैतिकता और परंपरा को  गुरु द्रोणाचार्य  और शिष्य की गुरु भक्ति से सीख लेनी चाहिए है। 
उल्लेखनीय है कि यहाँ स्थित ऐतिहासिक व पौराणिक तथा प्राचीन श्री गुरु द्रोणाचार्य मंदिर जिसमें भील युवराज एकलव्य द्वारा निर्मित श्री गुरु द्रोणाचार्य की पत्थर की मूर्ति विद्यमान है इस मूर्ति को गुरु का दर्जा देते हुए भील युवराज एकलव्य ने धनुर्विद्या सीखी और संभवत  है विश्व का सबसे बड़ा धनुर्धर होने का खिताब पाया श्री द्रोण की मूर्ति क्षेत्र ही नहीं प्रदेश और देश में श्रद्धालुओं की आराध्य श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। पिछले 20 वर्षों से इस नगरी को पर्यटन नगरी का दर्जा दिलाने के लिए क्षेत्र की जनता प्रयास जारी है। इस मौके पर श्री द्रोण पर्यटन संघर्ष समिति के अध्यक्ष पंकज कौशिक जो कि वे काफी समय से से लगातार दनकौर को पर्यटन सर्किट में शामिल कराने के लिए प्रयासरत हैं। द्रोणा मंदिर समिति प्रबंधक महिपाल गर्ग ने कहा कि अथक प्रयास व जनता के सहयोग से इस परिक्रमा का आयोजन पहली बार नगर क्षेत्र दनकौर में किया गया है जिसमें आज सैकड़ों भक्तों ने गुरु द्रोणाचार्य के चरणों की पवित्र माटी को माथे से लगाकर इस परिक्रमा में भागीदार बने है । गुरु द्रोणाचार्य परिक्रमा में बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं सभी गुरु द्रोणाचार्य की महिमा के उद्घोष और ढोल व नगाड़े के साथ इस परिक्रमा में शामिल रहे ।  परिक्रमा का उद्देश्य  गुरु द्रोणाचार्य  की महिमा  से अवगत कराना है  परिक्रमा में मंदिर समिति प्रबंधक महिपालगर्ग,  रजनीकांत अग्रवाल प्रबंधक श्री द्रोण गौशाला समिति, अनिल मांगलिक, पंकज कौशिक नंद किशोर गर्ग, संदीप जैन,संजय वर्मा, लक्ष्मीनारायण गर्ग, राधेश्याम प्रजापति पवन वर्मा, निरंजन वर्मा, पवन मित्तल, आशीष सिंघल, प्रमोद, अतुल मित्तल, राजेंद्र मित्तल इत्यादि समेत सैकड़ों लोग इस ऐतिहासिक परिक्रमा मैं शामिल रहे।
Share To:

Post A Comment: