दनकौर आशीष सिंघल:
महाभारत कालीन द्रोण नगरी दनकौर में स्थित श्री द्रोण गौशाला में लगभग एक हजार असहायक गोवंश है जिनकी सेवा श्री द्रोण गौशाला समिति आसपास के नागरिकों के सहयोग से करती है समिति के द्वारा श्री द्रोण गौशाला की नवनिर्मित यज्ञशाला में प्रत्येक पूर्णमासी को हवन का आयोजन प्रारंभ किया गया है कोई भी नागरिक अपने जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ, बच्चे का जन्मदिन, आदि जैसे शुभ अवसर पर श्री द्रोण गौशाला की नवनिर्मित यज्ञशाला में हवन कराने के लिए समिति में सुशील मांगलिक, मनीष अग्रवाल, एवं मोहित गर्ग से संपर्क कर सकता है जिसका मात्र 11 सो रुपए शुल्क रखा गया है जिसमें सारी हवन सामग्री से लेकर सभी चीज की व्यवस्था है श्री द्रोण गौशाला कमेटी के द्वारा प्राप्त होगी जिसमें पंडित जी की दक्षिणा भी शामिल है पूर्णमासी के अलावा आदमी अपने बच्चे का जन्मदिन बर्थडे पार्टी आदि की 2 दिन पहले श्री द्रोण गौशाला समिति के कमेटी के सदस्यों से अपनी तारीख बुक करा सकता है!
शोध संस्थानों के ताजा शोध नतीजे बताते हैं की हवन वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के साथ ही सेहत के लिए जरूरी है हवन के धुए से प्राण में संजीवनी शक्ति का संचार होता है हवन के माध्यम से बीमारियों से छुटकारा पाने का जिक्र ऋग्वेद में भी है हवन के लिए पवित्रता की जरूरत होती है ताकि सेहत के साथ उसकी आध्यात्मिक शुद्धता भी बनी रहे हवन करने से पूर्व स्वच्छता का ख्याल रखें हवन के लिए गाय के गोबर से बनी छोटी-छोटी कटोरिया या उपले घी में दुआ कर डाले जाते हैं हवन से हर प्रकार के 94% जीवाणुओं का नाश होता है | घर की शुद्धि तथा सेहत के लिए प्रत्येक घर में हवन करना चाहिए हवन के साथ कोई मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ध्वनि तरंग गीत होती है शरीर में ऊर्जा का संचार होता है अतः कोई भी मंत्र सुविधा अनुसार बोला जा सकता है हवन में अधिकतर आम की लकड़ी ओं का ही प्रयोग किया जाता है और जब आम की लकड़ियों को जलाया जाता है तो उनमें से एक लाभकारी गैस उत्पन्न होती है जिससे वातावरण में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणु समाप्त हो जाते हैं इसके साथ ही वातावरण शुद्ध होता है एक अन्य रिसर्च के मुताबिक यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाए और हवन के धुए का सही से संपर्क हो तो टाइफाइड जैसी जानलेवा रोग फैलाने वाले जीवाणु खत्म हो जाते हैं और शरीर स्वस्थ हो जाता है!








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