(आशीष सिंघल)
चन्द्रकान्ता महाविद्यालय, पीरबीयावानी,


में पूर्वाचल विश्वाविद्यालय जौनपुर के वित्त नियंत्रक नामवर पाण्डे ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की शुरूआत प्राथमिक शिक्षा के करनी होगी। 
उक्त बातें आज राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित एक दिवशीय शिविर को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम में विद्यार्थी एवं शिक्षकों का होना, और ऐसे कार्यक्रम  शिक्षकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के क्षेत्र में नित्य नए प्रयोग हो रहे है। जिसकी जानकारी हर हमेशा शिक्षकों को होनी चाहिए। गुणवतापूर्ण शिक्षा समय की पुकार है। इसके लिए प्राथमिक रूप से लेकर उच्च स्तर तक प्रयास होने चाहिए।पाण्डेय ने कहा कि समय की पुकार है कि शिक्षक अपनी पुरानी सोच में परिवर्तन लाए। नयी तरीके से अध्ययन-अध्यापन करें। अगर सोच में परिवर्तन नहीं लाएगे तो इस भूमंडलीकरण के दौर में यहाँ के छात्र प्रतिस्पर्धा से सफल नहीं हो पाएगे। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान दिया कि वे छात्रें में चरित्र निर्माण हो इस दिशा में भी सार्थक प्रयास करें। उन्होने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सत्त प्रयास करने पर जोर दिया उन्होनें ने कहा कि व्यक्ति को ’स्व’ की पहचान होनी आवश्यक है हम अधिकतर दुसरों की चिंता करते है - उन्होनें कहा कि इस महाविद्यालय में विभिन्न  विषयों के शिक्षक है अतः आपसी सहयोग से उन्हें सीखने में अधिक सुविधा होगी। अतः वे शिक्षा की गुणवक्ता को दिशा में सोच विकसित कर सकेगें।
कार्यक्रम अधिकारी डाँ० विप्लव ने कहा कि इस महाविद्यालय के शिक्षक काफी प्रतिभावान है। आवश्यकता है उनकी क्षमता में लगातार विकास हो इस ओर प्रयास होते रहना चाहिए।उन्होनें कहा कि हमें खुद पर सोचने की आवश्यकता है दूसरो पर नहीं परिचायात्मक सत्र् के बाद उन्होनें ’स्व’ को पहचानने की दिशा में प्रायोगिक पहलुओं पर चर्चा की।
डॉ संजीव ने कहा कि  देश में लगातार शिक्षा में सुधार होता रहा है। लेकिन अभी भी सुधार की काफी आवश्यकता है। शिक्षकों पर काफी जिम्मेवारी हे। इस अनुरूप शिक्षकों को अपना व्यवहार करना चाहिए। आगत अतिथियों का स्वागत  डॉ विप्लव कार्याक्रम अधिकारी  ने किया। वही धन्यवाद ज्ञापन नवजीत ने किया। जबकि मंच संचालन हरेन्द्र ने किया।
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