आशीष सिंघल दनकौर (ग्रेटर नॉएडा) 

कैसे थे वे लोग जिन्होंने, कष्ट यातना गोली झेली।
तनिक डरे ना,वो घबराहे, डटकर भारत की जय बोली।।

महान क्रांतिकारी, राष्ट्रवादी विचारक, चिंतक,मातृ भू के अप्रितम योद्धा 'वीर सावरकर' का जन्म दिवस आज सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज दनकौर में उत्साहपूर्वक मनाया गया।उक्त कार्यक्रम में उपस्थित आचार्यों के मध्य बोलते हुए विद्यालय के आचार्य श्री राजीव कुमार जी ने, सावरकर से जुड़े कई प्रसंगो को सुनाया।उन्होंने बताया कि सावरकर एक महान लेखक व ओजस्वी वक्ता थे।जिनकी पुस्तक '1857 का स्वातन्त्रय समर' प्रकाशन से पहले ही दो देशों के द्वारा प्रतिबन्धित कर दी गई थी। काले पानी की कठोर जेल भी जिनके संकल्प को डिगा नही सकी। दो जन्मो का आजीवन कारावास भी जिनके सामने बौना पड़ गया।
विद्यालय प्रधानाचार्य तथा कार्यक्रम अध्यक्ष श्री जे० पी० सिंह  ने सभी उपस्थित जनो से वीर सावरकर के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेने का आहवान किया।वन्दे मातरम के साथ विचार गोष्ठी का समापन किया गया।उक्त कार्यक्रम में श्रीमान शिवशंकर जी व राजकुमार जी व संजय जी व वी० के० सिंह जी आदि समस्त आचार्य उपस्थित रहे।
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