आशीष सिंघल
अपना और अपनों का विरोध फिर भी बना जीत का संयोग
Greater noida@ डॉ. सतीश शर्मा
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अपना और अपनों का विरोध फिर भी बना जीत का संयोग
Greater noida@ डॉ. सतीश शर्मा
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गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट पर रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत हासिल करने वाले सांसद डॉ महेश शर्मा ने क्षेत्रीय मतदाताओं के बीच अपना और अपनों के विरोध के चलते नया इतिहास रचा। आए दिन बदले चुनावी समीकरणों के बीच यह किसी अजूबे से कम नहीं रहा।
चुनाव प्रचार के दौरान कई स्थानों पर क्षेत्रीय सांसद का पुरजोर विरोध हुआ। जेवर विधायक के गढ़ में काले झंडे दिखाकर के जबरदस्त सुनियोजित विरोध की हवा बनाई गई। दनकौर क्षेत्र की कई गांव में अपने ही कार्यकर्ताओं ने बीजेपी नेताओं का आना मना है जैसे पोस्टर बैनर लगाकर सार्वजनिक प्रदर्शन कर डॉ महेश शर्मा की लोकप्रियता को बट्टा लगाने का प्रयास भी किया गया। अपने ही लोगों ने अनेक स्थानों पर लोगों में यह हवा फैलाई कि सांसद क्षेत्र में नहीं आते। उनका जनता के लोगों से कोई सरोकार नहीं। सांसद भाड़े के कार्यकर्ताओं से काम कराते हैं आदि आदि। इतना ही नहीं झाझर में चुनाव से कुछ दिन पूर्व राजनाथ सिंह की रैली में महेश शर्मा जी को जनता का सार्वजनिक विरोध भी झेलना पड़ा। हालांकि ठाकुर बिरादरी के क्षेत्र में हुई इस रैली में सारी स्थिति केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संभाली और भविष्य में उनसे जनता की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करने का वायदा भी कराया।
इन सब विरोधों और अंतर विरोधियों के बाद ऐन वक्त पर स्थिति बदली और लोगों का रुझान बदला।
डॉ महेश शर्मा को विजय दिलाने में ऐन वक्त पर जातीय ध्रुवीकरण और मोदी लहर ही काम आई। कई गुर्जर नेताओं का ऐन वक्त पर पार्टी में शामिल होना और नए गुर्जर नेता को जिले में बड़े नेताओं ने अपने समकक्ष नहीं बने रहने की वजह भी डॉ शर्मा की जीत में अहम भूमिका रही। लोकसभा मतदान के दौरान जन-जन में मोदी जी की नीतियों की लोकप्रियता के कारण ही प्रत्येक तबके के लोगों का वोट सांसद को मिला। वोट को लेकर घर घर के वोट बंटे। एक परिवार के लोगों में पिता ने सांसद को वोट दिया तो बेटों ने गठबंधन प्रत्याशी को। मतदान के दौरान अनेक स्थानों पर मतदाताओं का स्पष्ट कहना था कि वह महेश शर्मा को नहीं पार्टी और मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर राष्ट्रहित में वोट दे रहे हैं।
वर्षों से गौतम बुध नगर जिले में गुर्जर बिरादरी के कुछ बड़े नेताओं का ही दबदबा है। उन लोगों का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना और कुछ के शामिल होने की चर्चा अंत तक बने रहना भी महेश शर्मा की जीत की एक वजह रही। इस तबके के गुर्जर नेता अपने समकक्ष किसी अन्य नए नेता को नहीं उभरने देना चाहते। इन नेताओं की रणनीति महेश शर्मा की जीत में कारगर साबित हुई। पार्टी के कुछ अपने ही नेताओं ने विरोध तो किया लेकिन यह विरोध दबी जुबान से ही रहा। राजनाथ सिंह की रैली के बाद खास बिरादरी का यह विरोध भी हवा हो गया।


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