आशीष सिंघल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महंगाई के दौर में प्रदेश के निवासियों पर बिजली गिरा दी है। सरकार ने शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही कॉमर्शियल बिजली की दरों में इजाफा कर दिया है।
प्रदेश सरकार ने बिजली की नई दरों का आदेश जारी किया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने आदेश किया है। घरेलू सहित ज्यादातर श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो गई है।औसतन 11.69 फीसद मंहगी होगी बिजली। घरेलू 8-12 फीसद महंगी होगी।
यूपी में बिजली की दरों में औसत 12 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की संभावना थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन ने करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी की मांग की थी। उनकी इस मांग का बड़ा विरोध होने के बाद बीच का रास्ता निकाला गया। सूबे में आम लोगों-किसानों के विरोध के बाद भी बिजली की दरों में दस से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।
बढ़ोतरी के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में जहां 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र में यह इजाफा 10 फीसदी का किया गया है। इसके अलावा सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया है। प्रदेश में आम लोगों-किसानों के विरोध के बाद भी बिजली की दरों में 10स से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।
नियामक आयोग उपभोक्ताओं पर लगने वाले 4.28 फीसदी सरचार्ज को भी खत्म करने जा रहा है। इस नुकसान की भरपाई भी पॉवर कारपोरेशन टैरिफ बढ़ोतरी करके करना चाह रहा है। यह बढ़ोतरी होने से सबसे अधिक बोझ 68 लाख शहरी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। दो से पांच किलोवाट तक उपभोक्ताओं के प्रतिमाह बिल में औसत 100 से 300 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रदेश में करीब दो वर्ष बाद बढ़ोत्तरी की गई है। इससे पहले 2017 में बिजली की दरों में औसतन 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव खत्म होने के फौरन बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने सभी श्रेणियों के तकरीबन तीन करोड़ उपभोक्ताओं के लिए बिजली की मौजूदा दरों में जबरदस्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया था। इसके तहत घरेलू बिजली की दरें 6.20 से 7.50 रुपये प्रति यूनिट तक प्रस्तावित थीं। कामर्शियल बिजली की दरें भी 8.85 रुपये प्रति यूनिट तक करने के साथ ही फिक्स्ड चार्ज को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था। तभी से माना जा रहा था कि प्रस्ताव अमल में आने पर सबसे ज्यादा चोट गरीब परिवारों पर पडऩा तय है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महंगाई के दौर में प्रदेश के निवासियों पर बिजली गिरा दी है। सरकार ने शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही कॉमर्शियल बिजली की दरों में इजाफा कर दिया है।
प्रदेश सरकार ने बिजली की नई दरों का आदेश जारी किया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने आदेश किया है। घरेलू सहित ज्यादातर श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो गई है।औसतन 11.69 फीसद मंहगी होगी बिजली। घरेलू 8-12 फीसद महंगी होगी।
यूपी में बिजली की दरों में औसत 12 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की संभावना थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन ने करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी की मांग की थी। उनकी इस मांग का बड़ा विरोध होने के बाद बीच का रास्ता निकाला गया। सूबे में आम लोगों-किसानों के विरोध के बाद भी बिजली की दरों में दस से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।
बढ़ोतरी के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में जहां 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र में यह इजाफा 10 फीसदी का किया गया है। इसके अलावा सरकार ने ग्रामीण इलाकों में फिक्स चार्ज 400 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया है। प्रदेश में आम लोगों-किसानों के विरोध के बाद भी बिजली की दरों में 10स से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।
नियामक आयोग उपभोक्ताओं पर लगने वाले 4.28 फीसदी सरचार्ज को भी खत्म करने जा रहा है। इस नुकसान की भरपाई भी पॉवर कारपोरेशन टैरिफ बढ़ोतरी करके करना चाह रहा है। यह बढ़ोतरी होने से सबसे अधिक बोझ 68 लाख शहरी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। दो से पांच किलोवाट तक उपभोक्ताओं के प्रतिमाह बिल में औसत 100 से 300 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रदेश में करीब दो वर्ष बाद बढ़ोत्तरी की गई है। इससे पहले 2017 में बिजली की दरों में औसतन 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव खत्म होने के फौरन बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने सभी श्रेणियों के तकरीबन तीन करोड़ उपभोक्ताओं के लिए बिजली की मौजूदा दरों में जबरदस्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया था। इसके तहत घरेलू बिजली की दरें 6.20 से 7.50 रुपये प्रति यूनिट तक प्रस्तावित थीं। कामर्शियल बिजली की दरें भी 8.85 रुपये प्रति यूनिट तक करने के साथ ही फिक्स्ड चार्ज को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था। तभी से माना जा रहा था कि प्रस्ताव अमल में आने पर सबसे ज्यादा चोट गरीब परिवारों पर पडऩा तय है।


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