आशीष सिंघल दनकौर








द्रौण नगरी दनकौर के ऐतिहासिक कवि सम्मेलन में दर्शक हुए निराश,कवि सम्मेलन में कवि नहीं बांध सके शमा अशोक चारण और पवन दीक्षित ने जमकर वाहवाही लूटी।

ग्रेटर नोएडा। माँ सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ काव्य पाठ हुआ कवियों के काव्य पाठ का जायका मेले में देर रात तक चले झूलों ने बिगाड़ दी दनकौर नगरी में आजकल मेला चल रहा है इस मेले में मुख्य आकर्षण कुश्तियां और कवि सम्मेलन होते हैं हर साल कवि सम्मेलन पर हजारों लोग क्षेत्र से कवियों की कविताएं सुनने जाते हैं इस बार भी हजारों लोग कविताएं सुनने पहुंचे लेकिन निराश लौटे क्योंकि इस बार का कवि सम्मेलन पहली बार दनकौर के इतिहास में फीका दिखाई दिया इस कवि सम्मेलन में अशोक चारण और पवन दीक्षित को छोड़कर कोई भी कवि जनता को आकर्षित नहीं कर पाया इसी कारण कवि सम्मेलन में समा नहीं बन सका इस कवि सम्मेलन का संचालन चिराग जैन ने किया इसके अलावा कुशल कुशवाहा, भुवन मोहिनी, सुनहरी लाल तुरंत, मनीषा शुक्ला, शंभू शिखर, पार्थ नवीन, अशोक चारण और दनकौर के ही पवन दीक्षित ने कविताएं पढ़ी अशोक चारण की कविता 'मेरी मौत को मिले तिरंगा मर कर भी जाऊंगा" वहीं पवन दीक्षित के सारे काव्य लोगों ने सराहे।
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