रेनू शर्मा संवाददाता
बुलंदशहर, 5 नवंबर 2019। गर्भवती महिला स्वस्थ रहेगी, तो स्वस्थ बच्चे पैदा होंगे। इसके लिए आवश्यक है कि गर्भावस्था से लेकर दो वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के परिवारों को पोषण व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक किया जाए। इसी उद्देश्य से बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जनपद के 3958 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक माह की 10 तारीख को ग्रामीण पोषण दिवस मनाये जाने का निर्णय लिया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हरिओम बाजपेई ने बताया कुपोषण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु व उसके जीवन के पहले दो वर्षों पर सबसे अधिक पड़ता है। इसके बाद प्रयास करने पर भी कुपोषण को दूर करना कठिन हो जाता है। गर्भधारण से लेकर जीवन के पहले दो साल की अवधि अर्थात जीवन के पहले 1,000 दिन पोषण की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह अवधि बच्चों के सुपोषित भविष्य की नींव रखने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है। इसके लिए आवश्यक है कि समाज और परिवार में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को संतुलित व पौष्टिक आहार देने के प्रति जागरूकता बढ़े। इस संबंध में राज्य पोषण मिशन की महानिदेशक मोनिका एस. गर्ग ने जिला कार्यक्रम अधिकारियों को पत्र जारी किया है।
उन्होंने बताया पोषण दिवस के दिन केंद्र पर आने वाली गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, बच्चों और उनके परिवार वालों के बीच ऊपरी पूरक आहार पर चर्चा, स्वस्थ बच्चा बच्ची प्रतियोगिता (हेल्दी बेबी शो), स्वस्थ मां प्रतियोगिता के साथ-साथ 08 माह पूर्ण कर चुकी गर्भवती व 06 माह से ऊपर वाली धात्री माताओं के लिए मानक के बारे में लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ग्रामीण पोषण दिवस के दिन ही केंद्र पर मातृ समिति की बैठक भी होगी, जिसमें केंद्र पर चिन्हित कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम सभा की महिला सदस्य एवं मातृ समिति सदस्यों के बीच परिचर्चा की होगी। उन्होंने कहा कि उक्त दिवस को जिले में सफलतापूर्वक संचालित कराये जाने के लिए समस्त सीडीपीओ व प्रभारियों को पत्र भेजकर सूचित कर दिया गया है।
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बच्चों के आहार पर दें ध्यान
सीडीपीओ सोनम ने बताया छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार देने की शुरुआत करनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि जो भोजन दे रहे हैं, वह पौष्टिक हो तथा उसका गाढ़ापन उचित हो। जैसे-जैसे बच्चे की आयु बढ़ती जाये, भोजन की बारंबारता व मात्रा का ध्यान रखना चाहिए। बच्चे के भोजन में उचित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, रेशेयुक्त पदार्थ व सूक्ष्म पोषक तत्व की समुचित मात्रा हो। भोजन आकर्षित भी दिखना चाहिए तथा माताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को आहार खिलाते समय उनका पूरा ध्यान बच्चे पर ही हो। टीवी व मोबाइल देखते हुये खाना नहीं खिलाना चाहिए। ऊपरी आहार में घर में उपलब्ध स्थानीय व मौसमी खाद्य पदार्थों जैसे दाल, चावल, केला, आलू, हरी पत्तेदार सब्जियां, पीले फल व सब्जियां, सूजी देनी चाहिये। तेल या घी का ही उपयोग करना चाहिए। बाजार में उपलब्ध रेडीमेड भोजन से बचना ही चाहिए। ऊपरी आहार देते समय बच्चों को कहानी सुनानी चाहिए। इससे रोचकता बढ़ती है और बच्चा भरपेट भोजन भी कर लेता है। बच्चे को कटोरी और चम्मच से खाने की आदत डालनी चाहिए।


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