आशीष सिंघल ग्रेटर नॉएडा 







शारदा विश्वविधालय और भक्तिवेदांत संस्थान के सहयोग से "विज्ञान और आध्यात्मिकता" पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।
भक्तिवेदांत संस्थान, कोलकाता के अध्यक्ष श्री के. वासुदेव राव  और निदेशक श्री वरुण अग्रवाल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्तिथ थे ।
वक्ताओं का स्वागत शारदा  विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर डॉ जी. आर. सी. रेड्डी और शिक्षाविदों के डीन  प्रो. (डॉ.) सिबाराम खरा ने किया । इस वार्ता में विभाग के सारे अध्यक्ष, अधिकारी और अन्य संकायों के डीन भी मौजूद थे ।
डॉ जी. आर. सी. रेड्डी ने  कहा की आज हमारे बीच उपस्तिथ वक्ता शिक्षा की गुणवत्ता, विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अपने अनुभवों को साँझा करेंगे । 
डीन  प्रो. (डॉ.) सिबाराम खरा ने कहा की आज की संगोष्ठी का उद्देश्य व्यक्तिगत और साथ ही सामूहिक स्तर पर निरंतर सुख और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए 'मूल्यों' और 'कौशल' के बीच अपरिहार्य संबंध की सराहना करना है।
श्री के. वासुदेव राव ने कहा की विद्यार्थी स्नातकों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाएं, अपनी आत्म-जांच को प्रोत्साहित करें, और प्रभावी उपकरण के उनके अन्वेषण का समर्थन करें, ताकि प्रशंसित पेशेवर बन सकें, और नागरिक कारखानों, कंपनियों और पूरे ग्रह पर शांति, स्वास्थ्य और सद्भाव का निर्माण करने में सक्षम हों । उन्होंने समझाया की किस प्रकार  विज्ञान, शास्त्र, धर्म और योग विज्ञान एक-दूसरे के साथ परिपूर्ण हैं। धर्मों, ईश्वर और वैज्ञानिक कानूनों के बीच कोई विरोधाभास नहीं हो सकता। शास्त्र मिथक नहीं हैं, बल्कि सच्चाई से भरे हैं। विज्ञान और शास्त्र एक दूसरे के विरोधाभासी नहीं हैं ।
श्री वरुण अग्रवाल ने कहा की विद्यार्थी अपने ज्ञान और धर्म के क्षेत्र में रुचि विकसित करे और अपने जीवन में विज्ञान और आध्यात्मिकता का संश्लेषण, वेदांत और विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान के माध्यम से जीवन और ब्रह्मांड को समझने की कोशिश करे। तेजी से वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के कारण, हमारे पुराने विचार और दर्शन बदल रहे हैं और नए विचार और दर्शन जन्म ले रहे हैं। अब वैज्ञानिक महसूस करने लगे हैं कि दुनिया में हमारी मूल पहचान न तो मन है, न ही जन्म और मृत्यु से बंधे भौतिक शरीर, न ही समय और स्थान। लेकिन यह मूल रूप से अनंत ब्रह्मांडीय चेतना के साथ अनंत सार्वभौमिक और शाश्वत आत्मा है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ जी. आर. सी. रेड्डी  और डीन प्रो. (डॉ.) सिबाराम खरा द्वारा वक्ताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

डॉ. अजित कुमार 
संयुक्त रजिस्ट्रार और जनसंपर्क अधिकारी
शारदा  विश्वविद्यालय
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