रेनू शर्मा संवाददाता
बुलंदशहर। विश्व एड्स दिवस के तहत बुधवार को जिला अस्पताल के सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने एक मत से कहा कि एचआईवी संक्रमित लोगों से कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। एचआईवी की जांच एवं दवा सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है।
जिला अस्पताल के सभागार में एचआईवी- एड्स पर आयोजित संगोष्ठी में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रोहताश ने कहा- गर्भ में पल रहा बच्चा अपने पोषण के लिए मां पर ही निर्भर होता है, ऐसे में उसके संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। संगोष्ठी में प्रोजेक्ट ऑफिसर मोहम्मद आलम ने कहा एड्स को लेकर कई भ्रांतियां हैं जिन्हें दूर करना जरूरी है। एड्स के साथ जीने वाली महिला भी स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। लोगों को महज भ्रम है कि एचआईवी संक्रमित या एड्स प्रभावित महिला संक्रमित बच्चे को ही जन्म देगी। बच्चों को एचआईवी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 18 महीने तक विशेष ध्यान रखते हुए उपचार किया जाता है और बच्चे को एड्स से मुक्त कर लिया जाता है।
विभाग के नोडल अधिकारी डा. एमके गुप्ता ने कहा - ऐसे रोगियों के प्रति किसी प्रकार का भेदभाव समाज में नहीं करना चाहिए। सावधानी बरत कर इससे पूरी तरह से बचा जा सकता है।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक हरि प्रसाद ने जिले में एचआईवी मरीजों के कल्याण के लिए चल रहे कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल के लिए सामाजिक एवं पारिवारिक सहयोग आवश्यक है।
डा. गुप्ता ने बताया वर्ष 2017-18 में कुल 62000 महिलाओं की एचआईवी जांच कराई गई, जिसमें 17 महिलाओं की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आयी। वर्ष 2018-19 में कुल 75000 महिलाओं की जांच में 15 महिलाओं में संक्रमण मिला। वहीं वर्ष 2019-20 में कुल 64000 महिलाओं की जांच में 15 को एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। अबतक जनपद में करीब दो लाख महिलाओं की एचआईवी की जांच हुई, जिसमें 44 महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव मिली हैं। जनपद में सभी एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का नियमित इलाज चल रहा है।
सरकार के निर्देशानुसार हर गर्भवती महिला की एचआईवी जांच अनिवार्य है। जैसे ही कोई महिला गर्भधारण करती है और स्वास्थ्य केंद्र पर जाती है तो सबसे पहले उसकी एचआईवी की जांच की जाती है। अगर महिला संक्रमित पाई जाती है तो उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। उसके बाद उसके बच्चे को 18 महीने के इलाज से संक्रमण मुक्त करने का प्रयास किया जाता है।
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एड्स होने के प्रमुख कारण
असुरक्षित यौन संबंध
असुरक्षित इंजेक्शन
बिना जांच के ब्लड चढ़ाना
संक्रमित मां से बच्चे का जन्म




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